वाल्मीकि रामायण 6.65.7
राजशेषा कृता लङ्का क्षीणः कोशो बलं हतम्।राजानमिममासाद्य सुहृच्चिह्नममित्रकम्॥
rājaśeṣā kṛtā laṅkā kṣīṇaḥ kośo balaṃ hatam |rājānamimamāsādya suhṛccihnamamitrakam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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