वाल्मीकि रामायण 6.69.4
ब्रह्मदत्ता ऽस्ति ते शक्तिः कवचः सायको धनुः।सहस्रखरसंयुक्तो रथो मेघस्वनो महान्॥
brahmadattā 'sti te śaktiḥ kavacaḥ sāyako dhanuḥ |sahasrakharasaṃyukto ratho meghasvano mahān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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