वाल्मीकि रामायण 6.69.83
विद्रुतां वाहिनीं दृष्ट्वा स ददर्श नरान्तकम्।गृहीतप्रासमायान्तं हयपृष्ठे प्रतिष्ठितम्॥
vidrutāṃ vāhinīṃ dṛṣṭvā sa dadarśa narāntakam |gṛhītaprāsamāyāntaṃ hayapṛṣṭhe pratiṣṭhitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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