वाल्मीकि रामायण 6.69.84
अथोवाच महातेजाः सुग्रीवो वानराधिपः।कुमारमङ्गदं वीरं शक्रतुल्यपराक्रमम्॥
athovāca mahātejāḥ sugrīvo vānarādhipaḥ |kumāramaṅgadaṃ vīraṃ śakratulyaparākramam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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