वाल्मीकि रामायण 6.72.7
तन्न जाने प्रभावैर्वा मायया मोहनेन वा।शरबन्धाद्विमुक्तौ तौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ॥
tanna jāne prabhāvairvā māyayā mohanena vā |śarabandhādvimuktau tau bhrātarau rāmalakṣmaṇau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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