वाल्मीकि रामायण 6.75.3
ये ये महाबलाः सन्ति लघवश्च प्लवङ्गमाः।लङ्कामभ्युत्पतन्त्वाशु गृह्योल्काः प्लवगर्षभाः॥
ye ye mahābalāḥ santi laghavaśca plavaṅgamāḥ |laṅkāmabhyutpatantvāśu gṛhyolkāḥ plavagarṣabhāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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