वाल्मीकि रामायण 6.77.2
ततः स्रग्दामसन्नद्धं दत्तपञ्चाङ्गुलं शुभम्।आददे परिघं वीरो नगेन्द्रशिखरोपमम्॥
tataḥ sragdāmasannaddhaṃ dattapañcāṅgulaṃ śubham |ādade parighaṃ vīro nagendraśikharopamam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें