वाल्मीकि रामायण 6.77.3
हेमपट्टपरिक्षिप्तं वज्रविद्रुमभूषितम्।यमदण्डोपमं भीमं रक्षसां भयनाशनम्॥
hemapaṭṭaparikṣiptaṃ vajravidrumabhūṣitam |yamadaṇḍopamaṃ bhīmaṃ rakṣasāṃ bhayanāśanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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