वाल्मीकि रामायण 6.77.4
तमाविध्य महातेजाः शक्रध्वजसमं तदा।विननाद विवृत्तास्यो निकुम्भो भीम विक्रमः॥
tamāvidhya mahātejāḥ śakradhvajasamaṃ tadā |vinanāda vivṛttāsyo nikumbho bhīma vikramaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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