वाल्मीकि रामायण 6.80.8
सर्वतो ऽग्निं समास्तीर्य शरपत्रैः सतोमरैः।छागस्य कृष्णवर्णस्य गलं जग्राह जीवितः॥
sarvato 'gniṃ samāstīrya śarapatraiḥ satomaraiḥ |chāgasya kṛṣṇavarṇasya galaṃ jagrāha jīvitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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