वाल्मीकि रामायण 6.82.3
कस्माद्विषण्णवदना विद्रवध्वे प्लवङ्गमाः।त्यक्तयुद्धसमुत्साहाः शूरत्वं क्वनु वो गतम्॥
kasmādviṣaṇṇavadanā vidravadhve plavaṅgamāḥ |tyaktayuddhasamutsāhāḥ śūratvaṃ kvanu vo gatam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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