वाल्मीकि रामायण 6.82.4
पृष्ठतो ऽनुव्रजध्वं मामग्रतो यान्तमाहवे।शूरैरभिजनोपेतैरयुक्तं हि निवर्तितुम्॥
pṛṣṭhato 'nuvrajadhvaṃ māmagrato yāntamāhave |śūrairabhijanopetairayuktaṃ hi nivartitum ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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