वाल्मीकि रामायण 6.82.5
एवमुक्ताः सुसंहृष्टा वायुपुत्रेण वानराः।शैलशृङ्गाण्यगांश्चैव जगृहुर्हृष्टमानसाः॥
evamuktāḥ susaṃhṛṣṭā vāyuputreṇa vānarāḥ |śailaśṛṅgāṇyagāṃścaiva jagṛhurhṛṣṭamānasāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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