वाल्मीकि रामायण 6.82.8
स राक्षसानां कदनं चकार सुमहाकपिः।वृतो वानरसैन्येन कालान्तकयमोपमः॥
sa rākṣasānāṃ kadanaṃ cakāra sumahākapiḥ |vṛto vānarasainyena kālāntakayamopamaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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