वाल्मीकि रामायण 6.83.7
स तेन हरिसैन्येन सन्निकर्षं महायशाः।शीघ्रमागम्य रामाय दुःखितो वाक्यमब्रवीत्॥
sa tena harisainyena sannikarṣaṃ mahāyaśāḥ |śīghramāgamya rāmāya duḥkhito vākyamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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