वाल्मीकि रामायण 6.86.2
यदेतद्राक्षसानीकं मेघश्यामं विलोक्यते।एतदायोध्यतां शीघ्रं कपिभिः पादपायुधैः॥
yadetadrākṣasānīkaṃ meghaśyāmaṃ vilokyate |etadāyodhyatāṃ śīghraṃ kapibhiḥ pādapāyudhaiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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