वाल्मीकि रामायण 6.86.8
राक्षसाश्च शितैर्बाणैरसिभिः शक्तितोमरैः।उद्यतैः समवर्तन्त कपिसैन्यजिघांसवः॥
rākṣasāśca śitairbāṇairasibhiḥ śaktitomaraiḥ |udyataiḥ samavartanta kapisainyajighāṃsavaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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