वाल्मीकि रामायण 6.91.3
निबर्हयन्तश्चान्योन्यं ते राक्षसवनौकसः।भर्तारं न जहुर्युद्धे सम्पतन्तस्ततस्ततः॥
nibarhayantaścānyonyaṃ te rākṣasavanaukasaḥ |bhartāraṃ na jahuryuddhe sampatantastatastataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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