वाल्मीकि रामायण 6.91.4
ततस्तान् राक्षसान् सर्वान् हर्षयन् रावणात्मजः।स्तुवानो हर्षमाणश्च इदं वचनमब्रवीत्॥
tatastān rākṣasān sarvān harṣayan rāvaṇātmajaḥ |stuvāno harṣamāṇaśca idaṃ vacanamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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