वाल्मीकि रामायण 6.92.3
आजगाम ततस्तीव्रं यत्र सुग्रीवराघवौ।विभीषणमवष्टभ्य हनूमन्तं च लक्ष्मणः॥
ājagāma tatastīvraṃ yatra sugrīvarāghavau |vibhīṣaṇamavaṣṭabhya hanūmantaṃ ca lakṣmaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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