वाल्मीकि रामायण 6.92.4
ततो राममभिक्रम्य सौमित्रिरभिवाद्य च।तस्थौ भ्रातृसमीपस्थ इन्द्रस्येव बृहस्पतिः॥
tato rāmamabhikramya saumitrirabhivādya ca |tasthau bhrātṛsamīpastha indrasyeva bṛhaspatiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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