वाल्मीकि रामायण 6.99.5
निरीक्ष्य बलमुद्विग्नमङ्गदो राक्षसार्दितम्।वेगं चक्रे महाबाहुः समुद्र इव पर्वणि॥
nirīkṣya balamudvignamaṅgado rākṣasārditam |vegaṃ cakre mahābāhuḥ samudra iva parvaṇi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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