वाल्मीकि रामायण 7.100.19
ब्रह्मर्षिमेवमुक्त्वा तु भरतं सबलानुगम् ।आज्ञापयामास तदा कुमारौ चाभ्यषेचयत्॥
brahmarṣimevamuktvā tu bharataṃ sabalānugam |ājñāpayāmāsa tadā kumārau cābhyaṣecayat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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