वाल्मीकि रामायण 7.103.3
दूतो ऽस्म्यतिबलस्याहं महर्षेरमितौजसः ।रामं दिदृक्षुरायातः कार्येण हि महाबल॥
dūto 'smyatibalasyāhaṃ maharṣeramitaujasaḥ |rāmaṃ didṛkṣurāyātaḥ kāryeṇa hi mahābala ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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