वाल्मीकि रामायण 7.110.1
अध्यर्धयोजनं गत्वा नदीं पश्चान्मुखाश्रिताम् ।सरयूं पुण्यसलिलां ददर्श रघुनन्दनः॥
adhyardhayojanaṃ gatvā nadīṃ paścānmukhāśritām |sarayūṃ puṇyasalilāṃ dadarśa raghunandanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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