वाल्मीकि रामायण 7.110.15
सर्वं पुष्टं प्रमुदितं सुसम्पूर्णमनोरथम् ।साधु साध्विति तैर्देवैस्त्रिदिवं गतकल्मषम्॥
sarvaṃ puṣṭaṃ pramuditaṃ susampūrṇamanoratham |sādhu sādhviti tairdevaistridivaṃ gatakalmaṣam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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