वाल्मीकि रामायण 7.12.3
अथ दत्त्वा स्वयं रक्षो मृगयामटते स्म तत् ।तत्रापश्यत्ततो राम मयं नाम दितेः सुतम्॥
atha dattvā svayaṃ rakṣo mṛgayāmaṭate sma tat |tatrāpaśyattato rāma mayaṃ nāma diteḥ sutam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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