वाल्मीकि रामायण 7.14.1
ततस्तु सचिवैः सार्धं षड्भिर्नित्यं बलोद्धतैः ।महोदरप्रहस्ताभ्यां मारीचशुकसारणैः॥
tatastu sacivaiḥ sārdhaṃ ṣaḍbhirnityaṃ baloddhataiḥ |mahodaraprahastābhyāṃ mārīcaśukasāraṇaiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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