वाल्मीकि रामायण 7.16.5
किन्निमित्तं चेच्छया मे नेदं गच्छति पुष्पकम् ।पर्वतस्योपरिष्ठस्य कर्मेदं कस्यचिद्भवेत्॥
kinnimittaṃ cecchayā me nedaṃ gacchati puṣpakam |parvatasyopariṣṭhasya karmedaṃ kasyacidbhavet ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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