वाल्मीकि रामायण 7.18.4
दृष्ट्वा देवास्तु तद्रक्षो वरदानेन दुर्जयम् ।तिर्यग्योनिं समाविष्टास्तस्य दर्शनभीरवः॥
dṛṣṭvā devāstu tadrakṣo varadānena durjayam |tiryagyoniṃ samāviṣṭāstasya darśanabhīravaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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