वाल्मीकि रामायण 7.18.8
ततो मरुत्तो नृपतिः को भवानित्युवाच तम् ।अपहासं ततो मुक्त्वा रावणो वाक्यमब्रवीत्॥
tato marutto nṛpatiḥ ko bhavānityuvāca tam |apahāsaṃ tato muktvā rāvaṇo vākyamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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