वाल्मीकि रामायण 7.20.21
स तु शारदमेघाभं हासं मुक्त्वा दशाननः ।उवाच कृतमित्येव वचनं चेदमब्रवीत्॥
sa tu śāradameghābhaṃ hāsaṃ muktvā daśānanaḥ |uvāca kṛtamityeva vacanaṃ cedamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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