वाल्मीकि रामायण 7.23.2
ततो रुधिरसिक्ताङ्गं प्रहारैर्जर्जरीकृतम् ।रावणं राक्षसा दृष्ट्वा ह्यष्टवत् समुपागमन्॥
tato rudhirasiktāṅgaṃ prahārairjarjarīkṛtam |rāvaṇaṃ rākṣasā dṛṣṭvā hyaṣṭavat samupāgaman ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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