वाल्मीकि रामायण 7.23.3
जयेन वर्धयित्वा च मारीचप्रमुखास्ततः ।पुष्पकं भेजिरे सर्वे सान्त्विता रावणेन तु॥
jayena vardhayitvā ca mārīcapramukhāstataḥ |puṣpakaṃ bhejire sarve sāntvitā rāvaṇena tu ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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