वाल्मीकि रामायण 7.23.4
ततो रसातलं गच्छन् प्रविष्टः पयसां निधिम् ।दैत्योरगगणाध्युष्टं वरुणेन सुरक्षितम्॥
tato rasātalaṃ gacchan praviṣṭaḥ payasāṃ nidhim |daityoragagaṇādhyuṣṭaṃ varuṇena surakṣitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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