वाल्मीकि रामायण 7.23.8
शूलैस्त्रिशूलैः कुलिशैः पट्टिशासिपरश्वधैः ।अन्योन्यं बिभिदुः क्रुद्धा राक्षसा दानवास्तथा॥
śūlaistriśūlaiḥ kuliśaiḥ paṭṭiśāsiparaśvadhaiḥ |anyonyaṃ bibhiduḥ kruddhā rākṣasā dānavāstathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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