वाल्मीकि रामायण 7.24.3
एवं पन्नगकन्याश्च राक्षसासुरमानुषीः ।यक्षदानवकन्याश्च विमाने सो ऽध्यरोपयत्॥
evaṃ pannagakanyāśca rākṣasāsuramānuṣīḥ |yakṣadānavakanyāśca vimāne so 'dhyaropayat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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