वाल्मीकि रामायण 7.26.42
स्मि यदवोचस्त्वमेकपत्नीष्वयं क्रमः ।एवमुक्त्वा स तां रक्षो निवेश्य च शिलातले ।कामभोगाभिसंसक्तो मैथुनायोपचक्रमे॥
smi yadavocastvamekapatnīṣvayaṃ kramaḥ |evamuktvā sa tāṃ rakṣo niveśya ca śilātale |kāmabhogābhisaṃsakto maithunāyopacakrame ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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