वाल्मीकि रामायण 7.31.2
भगवन्राक्षसः क्रूरो यदाप्रभृति मेदिनीम् ।पर्यटत्किं तदा लोकाः शून्या आसन्द्विजोत्तम॥
bhagavanrākṣasaḥ krūro yadāprabhṛti medinīm |paryaṭatkiṃ tadā lokāḥ śūnyā āsandvijottama ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें