वाल्मीकि रामायण 7.34.17
द्रक्ष्यन्त्यरिं ममाङ्कस्थं स्रंसदूरुकराम्बरम् ।लम्बमानं दशग्रीवं गरुडस्येव पन्नगम्॥
drakṣyantyariṃ mamāṅkasthaṃ sraṃsadūrukarāmbaram |lambamānaṃ daśagrīvaṃ garuḍasyeva pannagam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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