वाल्मीकि रामायण 7.34.4
ततस्तु वानरामात्यस्तारस्तारापिता प्रभुः ।उवाच वानरो वाक्यं युद्धप्रेप्सुमुपागतम्॥
tatastu vānarāmātyastārastārāpitā prabhuḥ |uvāca vānaro vākyaṃ yuddhaprepsumupāgatam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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