वाल्मीकि रामायण 7.34.5
राक्षसेन्द गतो वाली यस्ते प्रतिबलो भवेत् ।को ऽन्यः प्रमुखतः स्थातुं तव शक्तः प्लवङ्गमः॥
rākṣasenda gato vālī yaste pratibalo bhavet |ko 'nyaḥ pramukhataḥ sthātuṃ tava śaktaḥ plavaṅgamaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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