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वाल्मीकि रामायण 7.38.33
पूजिताश्चैव रामेण जग्मुर्देशान्स्वकान्स्वकान्॥
pūjitāścaiva rāmeṇa jagmurdeśānsvakānsvakān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंपूजिताश्चैव रामेण जग्मुर्देशान्स्वकान्स्वकान्॥
pūjitāścaiva rāmeṇa jagmurdeśānsvakānsvakān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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