वाल्मीकि रामायण 7.42.1
स विसृज्य ततो रामः पुष्पकं हेमभूषितम् ।प्रविवेश महाबाहुरशोकवनिकां तदा॥
sa visṛjya tato rāmaḥ puṣpakaṃ hemabhūṣitam |praviveśa mahābāhuraśokavanikāṃ tadā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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