वाल्मीकि रामायण 7.49.2
अभिवाद्य मुनेः पादौ मुनिपुत्रा महर्षये ।सर्वं निवेदयामासुस्तस्यास्तु रुदितस्वनम्॥
abhivādya muneḥ pādau muniputrā maharṣaye |sarvaṃ nivedayāmāsustasyāstu ruditasvanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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