वाल्मीकि रामायण 7.49.4
भगवन्साधु पश्य त्वं देवतामिव खाच्च्युताम् ।नद्यास्तु तीरे भगवन्वरस्त्री कापि दुःखिता॥
bhagavansādhu paśya tvaṃ devatāmiva khāccyutām |nadyāstu tīre bhagavanvarastrī kāpi duḥkhitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें