वाल्मीकि रामायण 7.49.5
दृष्टास्माभिः प्ररुदिता दृढं शोकपरायणा ।अनर्हा दुःखशोकाभ्यामेकां दीनां ह्यनाथवत्॥
dṛṣṭāsmābhiḥ praruditā dṛḍhaṃ śokaparāyaṇā |anarhā duḥkhaśokābhyāmekāṃ dīnāṃ hyanāthavat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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