वाल्मीकि रामायण 7.55.4
आसीद्राजा निमिर्नाम इक्ष्वाकूणां महात्मनाम् ।पुत्रो द्वादशमो वीर्ये धर्मे च परिनिष्ठितः॥
āsīdrājā nimirnāma ikṣvākūṇāṃ mahātmanām |putro dvādaśamo vīrye dharme ca pariniṣṭhitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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