वाल्मीकि रामायण 7.55.5
स राजा वीर्यसम्पन्नः पुरं देवपुरोपमम् ।निवेशयामास तदा अभ्याशे गौतमस्य तु॥
sa rājā vīryasampannaḥ puraṃ devapuropamam |niveśayāmāsa tadā abhyāśe gautamasya tu ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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