वाल्मीकि रामायण 7.55.7
तस्य बुद्धिः समुत्पन्ना निवेश्य सुमहापुरम् ।यजेयं दीर्घसत्रेण पितुः प्रह्लादयन्मनः॥
tasya buddhiḥ samutpannā niveśya sumahāpuram |yajeyaṃ dīrghasatreṇa pituḥ prahlādayanmanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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